मेरी डायरी – हमारी प्रेम कहानी ❤️
प्रिय डायरी,
आज फिर पुरानी यादें आँखों के सामने आ गईं। सोचता हूँ, अगर उस दिन मैंने रास्ता न पूछा होता, तो शायद मेरी ज़िंदगी कभी इतनी खूबसूरत नहीं बनती।
उस दिन मैं एक अनजान जगह पर था। मुझे रास्ता नहीं पता था। तभी मैंने एक लड़की से पूछा, “माफ़ कीजिए, यह रास्ता किधर जाता है?” वह मुस्कुराई और मुझे रास्ता बता दिया। उसकी मुस्कान में कुछ ऐसा था जिसने मेरे दिल को पहली ही नज़र में छू लिया।
पता नहीं कैसे, लेकिन हम दोनों पास के एक पार्क में जाकर बैठ गए। वहाँ हमने घंटों बातें कीं। उसने अपने बारे में बताया, मैंने अपने बारे में। पहली बार लगा कि कोई मुझे बिना किसी दिखावे के समझ रहा है।
उस दिन के बाद हमारी बातें Instagram पर शुरू हो गईं। पहले सिर्फ़ कुछ मैसेज होते थे, फिर घंटों चैट होने लगी। सुबह उसकी “Good Morning” और रात की “Good Night” मेरी आदत बन गई। पता ही नहीं चला कि कब दोस्ती प्यार में बदल गई।
चार महीने तक मैं सिर्फ़ उस दिन का इंतज़ार करता रहा, जब मैं उससे मिल सकूँ।
आख़िर वह दिन आ गया। मैं दिल्ली के लिए निकल पड़ा। लेकिन शायद मेरी मोहब्बत की परीक्षा हो रही थी। मेरी ट्रेन बार-बार छूट गई। रास्ते में कई मुश्किलें आईं। एक पल को लगा कि शायद किस्मत मुझे उससे मिलने नहीं देना चाहती।
लेकिन मैंने हार नहीं मानी। क्योंकि मुझे दिल्ली नहीं जाना था… मुझे काजल से मिलना था।
जब मैं दिल्ली पहुँचा और उसने सामने आकर मुस्कुराते हुए मुझे देखा, तो लगा कि सारी परेशानियाँ उसी पल खत्म हो गईं। चार महीने का इंतज़ार उसकी एक मुस्कान के आगे बहुत छोटा लगने लगा।
उस दिन हम साथ घूमे, बातें कीं, खूब हँसे, तस्वीरें खिंचवाईं और हर पल को जी भरकर जिया। मैं बस उसे देखता रहा और दिल ही दिल में भगवान का शुक्रिया अदा करता रहा कि उन्होंने मुझे उससे मिलाया।
आज भी जब उस दिन को याद करता हूँ, तो मुस्कुरा देता हूँ। हमारी कहानी किसी बड़े वादे से नहीं, बल्कि एक छोटे-से सवाल से शुरू हुई थी—
“रास्ता कहाँ है?”
और उस सवाल का जवाब मुझे सिर्फ़ रास्ता नहीं, बल्कि मेरी पूरी ज़िंदगी दे गया।
काजल, अगर तुम कभी यह डायरी पढ़ो, तो बस इतना जानना…
मैं आज भी उसी दिन की तरह तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ।
आज का दिन मेरी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत भी था और सबसे मुश्किल भी।
शाम हो चुकी थी। अब वापस लौटने का समय आ गया था। मुझे दिल्ली से आज़मगढ़ जाना था और काजल को अपने घर, पीरागढ़ी मेट्रो स्टेशन के पास डी-ब्लॉक।
हम दोनों साथ खड़े थे, लेकिन कुछ ही पलों में फिर से दूर होने वाले थे। दिल चाहता था कि समय यहीं रुक जाए।
मैंने खुद को संभालने की बहुत कोशिश की, लेकिन आँखों में आँसू आ ही गए। मैं नहीं चाहता था कि काजल मुझे रोते हुए देखे। इसलिए मैं जल्दी से पास की एक दुकान पर गया, पानी की बोतल खरीदी और चेहरे पर पानी डालकर अपने आँसू छिपाने लगा।
जब वापस आया, तो हम दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामा। कुछ पल तक बिना कुछ कहे बस एक-दूसरे को देखते रहे। उन ख़ामोश नज़रों में जितनी बातें थीं, शायद उतनी शब्दों में कभी नहीं हो सकतीं।
फिर काजल बस में बैठकर अपने घर की ओर निकल गई और मैं पैदल रेलवे स्टेशन की तरफ चल पड़ा।
स्टेशन पहुँचकर पता चला कि मेरी ट्रेन आने में अभी पूरे तीन घंटे बाकी हैं। मेरे फोन की बैटरी भी लगभग खत्म हो चुकी थी। मैंने फोन चार्जिंग पर लगाया और वहीं बैठ गया। उस दिन मेरा फोन भी जैसे मेरा साथ नहीं दे रहा था। 1% से शुरू होकर करीब 30–40 मिनट में सिर्फ़ 34% तक ही पहुँचा था।
तभी अचानक फोन बजा…
स्क्रीन पर नाम चमका—”Kajal Calling…”
मैंने तुरंत कॉल उठाई।
“हाँ, सोना… घर पहुँच गई?”
उधर से उसकी प्यारी-सी आवाज़ आई—
“नहीं… मैं अभी घर नहीं गई हूँ। आप कहाँ हो?”
मैंने उसे सब कुछ बताया कि मैं स्टेशन पर हूँ और ट्रेन का इंतज़ार कर रहा हूँ।
वह कुछ पल चुप रही, फिर बोली—
“मैं वहीं आ रही हूँ।”
मैंने कहा—
“अगर कोई ज़रूरी बात है तो बता दो, फोन पर भी तो बता सकती हो।”
वह मुस्कुराते हुए बोली—
“नहीं… ये बात सामने आकर ही कहूँगी।”
मैंने भी मुस्कुराकर कहा—
“ठीक है… मैं इंतज़ार करता हूँ।”
करीब दस मिनट बाद उसका फिर से कॉल आया।
“बाहर आ जाइए…”
मैं स्टेशन से बाहर आया। वह सामने खड़ी थी। मैं उसके पास गया और धीरे से पूछा—
“क्या हुआ, सोना? सब ठीक है ना?”
उसने बिना कुछ कहे मेरा हाथ पकड़ा और मुझे थोड़ी दूर, एक शांत जगह पर ले गई। वहाँ आसपास कोई नहीं था।
अचानक उसने मुझे कसकर गले लगा लिया।
कुछ पल तक हम दोनों कुछ नहीं बोले।
फिर उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
“I love you, Prince… मुझे कभी छोड़कर मत जाना।”
उसकी ये बात सुनते ही मेरी आँखें फिर से भर आईं। लेकिन इस बार मैंने अपने आँसुओं को रोक लिया।
मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा और मुस्कुराकर कहा—
“अरे पागल… मैं कहीं नहीं जा रहा। मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ। चाहे दूरी कितनी भी हो, मेरा दिल हमेशा तुम्हारे पास रहेगा।”
उसने मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा। उस मुस्कान में भरोसा था… प्यार था… और हमेशा साथ रहने का वादा था।
कुछ देर बाद मैं उसे मेट्रो तक छोड़ने गया। मेट्रो का दरवाज़ा बंद हुआ। उसने जाते-जाते आख़िरी बार मुड़कर मुझे देखा… और मैं तब तक उसे देखता रहा, जब तक मेट्रो मेरी नज़रों से ओझल नहीं हो गई।
मैं वापस रेलवे स्टेशन आया और अपनी ट्रेन का इंतज़ार करने लगा।
कुछ देर बाद ट्रेन आई। मैं उसमें बैठ गया। सफ़र लंबा था। करीब 12 घंटे बाद मैं अपने घर, आज़मगढ़ पहुँच गया।
घर तो आ गया था…
लेकिन मेरा दिल अब भी दिल्ली की उन्हीं गलियों में, काजल के पास रह गया था।
लेकिन हमारी कहानी यहीं खत्म नहीं होती…
अगले भाग में हमारी मोहब्बत की कहानी एक नया मोड़ लेगी। ❤️
“एक बार फिर मैं आ गया हूँ अपनी प्यार की दुनिया में… यह हमारी कहानी का तीसरा भाग है।”
प्रिय डायरी,
दिल्ली से घर लौटने के बाद सबसे पहले मैंने अपने दिल की धड़कन, अपनी काजल को कॉल किया।
“हेलो, सोना… मैं सही-सलामत घर पहुँच गया हूँ।”
मेरी बात सुनते ही उसकी आवाज़ में जो सुकून था, वह आज भी मेरे कानों में गूंजता है।
उसने मुस्कुराते हुए कहा,
“अब चैन मिला… मैं बस यही चाहती थी कि मेरा प्यार सुरक्षित घर पहुँच जाए।”
उस दिन के बाद फिर हमारी वही पुरानी दुनिया शुरू हो गई। घंटों तक कॉल पर बातें करना, छोटी-छोटी बातों पर हँसना, कभी प्यार से बात करना, कभी गुस्सा हो जाना, कभी भविष्य के सपने देखना, कभी पढ़ाई की बातें, कभी बिज़नेस के प्लान… और कभी बिना किसी वजह के सिर्फ़ एक-दूसरे की आवाज़ सुनते रहना।
लेकिन ज़िंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती।
कुछ ही दिनों बाद मेरी चाचा की बेटी की शादी थी। घर में तैयारियाँ शुरू हो गईं और मैं भी उन कामों में व्यस्त हो गया।
फिर भी मुझे पता था कि कहीं न कहीं काजल मेरे एक कॉल और एक मैसेज का इंतज़ार कर रही होगी।
कई बार जब मैं व्यस्त रहता, तब वह अपने इंतज़ार को कम करने के लिए ड्रामा देखती, लेकिन उसके दिल में इंतज़ार हमेशा मेरा ही रहता था।
मैं भी जैसे ही थोड़ा खाली होता, सबसे पहले उसे कॉल करता।
फिर अचानक 26 मार्च को पता चला कि मेरा B.A. का एग्ज़ाम भी आने वाला है, जबकि घर में शादी 28–29 मार्च को थी।
अब मेरे सामने दो बड़ी ज़िम्मेदारियाँ थीं—एक तरफ़ परिवार की शादी और दूसरी तरफ़ मेरी पढ़ाई।
दिन में शादी के काम और रात में किताबें…
थक जाता था, लेकिन हर बार काजल मेरा हौसला बन जाती।
वह हमेशा कहती,
“आप बस मेहनत करो… सब अच्छा होगा। मैं हमेशा आपके साथ हूँ।”
आख़िरकार शादी का दिन भी आ गया।
उसी दिन सुबह 10 बजे से 12 बजे तक मेरा एग्ज़ाम था।
मैं एग्ज़ाम देकर सीधे घर पहुँचा और बिना आराम किए फिर शादी की तैयारियों में लग गया। उस दिन थकान बहुत थी, लेकिन दिल में खुशी भी थी कि मैंने अपनी दोनों ज़िम्मेदारियाँ निभाईं।
शादी के बाद मैं कुछ दिन घर पर रहा।
फिर काम के सिलसिले में गोवा चला गया।
लेकिन वहाँ पहुँचते ही मेरी तबीयत बिगड़ गई।
मैंने यह बात काजल को बताई।
उसने बिना एक पल सोचे कहा—
“घर वापस आ जाइए। काम फिर मिल जाएगा, लेकिन सेहत दोबारा इतनी आसानी से नहीं मिलती। मुझे आपकी फ़िक्र है।”
उसकी बात मेरे दिल को छू गई।
मैंने उसकी बात मानी और वापस घर आ गया।
उस दिन मुझे एहसास हुआ कि सच्चा प्यार सिर्फ़ “I Love You” कहने में नहीं होता…
सच्चा प्यार उस इंसान की चिंता करने में होता है।
आज भी हम दोनों लगभग 1200 किलोमीटर दूर हैं।
लेकिन दूरियाँ हमारे प्यार को कम नहीं कर सकीं।
हम कभी लड़ते हैं…
कभी रूठते हैं…
कभी घंटों बहस करते हैं…
और फिर कुछ ही देर बाद एक-दूसरे को मनाने लगते हैं।
हमारा रिश्ता बिल्कुल नए शादीशुदा पति-पत्नी जैसा लगता है।
बस फ़र्क इतना है कि हमारे बीच अभी भी हज़ारों किलोमीटर की दूरी है।
हमारी बहुत-सी बातें ऐसी हैं जो सिर्फ़ हमारे दिलों तक सीमित हैं।
वो यादें…
वो वादे…
वो सपने…
उन्हें हम हमेशा अपने पास ही रखना चाहते हैं।
और शायद यही हमारी मोहब्बत की सबसे खूबसूरत बात है।
यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई…
क्योंकि यह कोई कल्पना नहीं…
यह हमारी असली ज़िंदगी की कहानी है।
जब तक हम हैं…
जब तक हमारी साँसें हैं…
और जब तक हमारा प्यार है…
तब तक इस कहानी का हर नया अध्याय लिखता रहूँगा।
I Love You, Sona… ❤️🥹
– हमेशा तुम्हारा,
Prince
– हमेशा तुम्हारा, PRINSH YADAV 🥰
