यह कहानी का अगला भाग है:
पुराने कुएँ का रहस्य – भाग 2
मैंने धीरे-धीरे पीछे मुड़कर देखा।
मेरे सामने एक लड़की खड़ी थी।
उसने सफेद रंग का पुराना सूट पहना हुआ था। उसके लंबे बाल चेहरे पर बिखरे हुए थे।
सबसे डरावनी बात यह थी कि उसके पैर जमीन को छू नहीं रहे थे।
वह हवा में कुछ इंच ऊपर खड़ी थी।
मेरी साँसें तेज हो गईं।
मैं पीछे हटने लगा।
लेकिन तभी वह लड़की मुस्कुराई।
उसकी मुस्कान किसी इंसान जैसी नहीं थी।
उसके होंठ कानों तक फैल गए।
“तुम यहाँ क्यों आए हो?” उसने धीमी आवाज में पूछा।
मैं कुछ बोल नहीं पाया।
गला जैसे सूख गया था।
अचानक मेरी टॉर्च बंद हो गई।
चारों तरफ घना अंधेरा छा गया।
मैंने टॉर्च को कई बार थपथपाया लेकिन वह चालू नहीं हुई।
तभी मुझे अपने कान के पास किसी की फुसफुसाहट सुनाई दी।
“भाग जाओ…”
मैंने घबराकर पीछे देखा।
कोई नहीं था।
लेकिन अगले ही पल कुएँ के अंदर से कई लोगों के चिल्लाने की आवाजें आने लगीं।
ऐसा लग रहा था जैसे दर्जनों लोग मदद के लिए पुकार रहे हों।
“हमें बचाओ…”
“हमें बाहर निकालो…”
“हमें मत छोड़ो…”
मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई।
मैं दौड़कर वहाँ से भागना चाहता था लेकिन मेरे पैर जैसे जमीन से चिपक गए थे।
तभी अचानक कुएँ के अंदर से एक हाथ बाहर निकला।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
मैंने अपनी आँखों पर विश्वास नहीं किया।
कुएँ की दीवारों पर दर्जनों काले हाथ रेंग रहे थे।
जैसे कोई बाहर निकलने की कोशिश कर रहा हो।
अचानक एक जोरदार चीख गूँजी।
और सब कुछ शांत हो गया।
मैंने देखा कि वह लड़की अब कुएँ के किनारे खड़ी थी।
उसकी आँखें पूरी तरह काली हो चुकी थीं।
वह मेरी तरफ इशारा कर रही थी।
“सच्चाई जाननी है?”
उसने पूछा।
मेरे मुँह से अनजाने में निकल गया।
“हाँ।”
लड़की ने कुएँ की ओर इशारा किया।
और उसी क्षण मेरे सामने का दृश्य बदल गया।
मुझे लगा जैसे मैं किसी और समय में पहुँच गया हूँ।
चारों तरफ वही जगह थी लेकिन सब कुछ नया दिखाई दे रहा था।
कुआँ बिल्कुल साफ था।
पास में कई लोग खड़े थे।
उनमें से एक आदमी रस्सी पकड़े हुए था।
और उसके सामने वही लड़की खड़ी थी।
लेकिन इस बार वह जीवित थी।
उसका नाम राधा था।
मैं यह सब कैसे जान रहा था, मुझे खुद समझ नहीं आ रहा था।
अचानक गाँव के कुछ लोग राधा को पकड़ लेते हैं।
वह रोती है।
गिड़गिड़ाती है।
लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुनता।
फिर…
उसे जिंदा कुएँ में धक्का दे दिया जाता है।
मेरे मुँह से चीख निकल गई।
मैं समझ गया कि यह कोई साधारण आत्मा नहीं थी।
उसके साथ बहुत बड़ा अन्याय हुआ था।
राधा कुएँ में गिरते समय चिल्लाई थी—
“मैं वापस आऊँगी… और किसी को नहीं छोड़ूँगी।”
दृश्य अचानक खत्म हो गया।
मैं फिर वर्तमान में लौट आया।
लेकिन अब कुएँ के आसपास सैकड़ों परछाइयाँ खड़ी थीं।
वे सभी मुझे घूर रही थीं।
उनमें से हर एक की आँखें काली थीं।
और तभी मुझे एहसास हुआ।
ये सभी लोग उसी कुएँ के शिकार थे।
मैंने भागने की कोशिश की।
लेकिन एक परछाईं ने मेरा हाथ पकड़ लिया।
उसका स्पर्श बर्फ से भी ज्यादा ठंडा था।
“अब तुम भी यहीं रहोगे…”
उसने कहा।
मैं पूरी ताकत से चिल्लाया।
और उसी समय दूर कहीं मंदिर की घंटी बजने लगी।
घंटी की आवाज सुनते ही सारी परछाइयाँ पीछे हट गईं।
मुझे मौका मिल गया।
मैं जंगल की ओर भागा।
लेकिन भागते-भागते मैंने पीछे मुड़कर देखा।
और जो मैंने देखा…
उसे देखकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई।
कुएँ के ऊपर अब राधा अकेली नहीं थी।
उसके पीछे सैकड़ों आत्माएँ खड़ी थीं।
और वे सभी एक साथ मुस्कुरा रही थीं…
(जारी…)
इस कहानी का अगला भाग और भी ज़्यादा रहस्यमयी होगा, जहाँ अर्जुन को पता चलेगा कि राधा की मौत के पीछे पूरे गाँव का एक भयानक रहस्य छिपा है।
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