लोहार की अक्लमंदी से बचा पूरा राज्य

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बहुत समय पहले की बात है, “सूर्यगढ़” नाम का एक समृद्ध राज्य था। वहाँ का राजा “वीरप्रताप सिंह” न्यायप्रिय था, पर एक समस्या थी — वो दूसरों की बातों में बहुत जल्दी आ जाता था। उसका दरबार कई तरह के दरबारी चापलूसों से भरा हुआ था।

राज्य में एक गांव था “लौहपुर”, जहाँ का लोहार “शिवा” अपनी कारीगरी के लिए पूरे राज्य में मशहूर था। उसके बनाए औज़ार, हथियार और कवच दूर-दूर तक भेजे जाते थे।

खतरे की घंटी

एक दिन राजा के जासूसों ने खबर दी —

> “महाराज, सीमावर्ती राज्य ‘कृपाणपुर’ हम पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने एक ऐसा रथ बनाया है जो आग उगलता है और जिसे तोड़ना नामुमकिन है। अगर वो युद्ध में आया, तो हमारा किला भी नहीं बचेगा।”

दरबार में हलचल मच गई। सेनापति बोले — “हमारे पास ऐसा कोई हथियार नहीं जो उस रथ को रोक सके।”

राजा चिंता में डूब गया। तभी राजगुरु बोले —

> “महाराज, लोहार शिवा के पास भेजिए, वो कोई उपाय ज़रूर निकालेगा।”

राजा को बात ठीक लगी। शिवा को बुलवाया गया।

लोहार की परीक्षा

राजा ने शिवा से कहा,

> “अगर तुमने ऐसा हथियार नहीं बनाया जो उस रथ को रोक सके, तो तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा।”

शिवा मुस्कुराया और बोला,

> “महाराज, एक हफ़्ता दीजिए… रथ क्या, उसकी आत्मा तक हिल जाएगी।”

राजा चौंका, मगर वादा कर बैठा।

शिवा की योजना

शिवा ने लोहे की मोटी-मोटी चादरें, जाल, छर्रे और लपेटने वाला तार मंगवाया। उसने एक विचित्र चीज़ बनाई —

> एक विशालकाय चुंबकीय फंदा जो ज़मीन में गाड़ा जा सकता था।

उसने गांव के बच्चों को बुलाया और उनसे कहा —

“इस रथ को गिराने के लिए ताकत नहीं, चालाकी चाहिए।”

बच्चों ने उसकी योजना के अनुसार किले के सामने एक छोटी सी जगह खोदी, उसमें चुंबकीय जाल बिछाया और उसके ऊपर मिट्टी डाल दी।

युद्ध का दिन

कृपाणपुर का रथ पूरी शान से चला आ रहा था — उसके ऊपर आग बरसाने वाली मशीने, विशाल पहिए और लोहे की चादरें थीं।

राजा वीरप्रताप सिंह किले की ऊँचाई से सब देख रहा था और मन ही मन शिवा की सोच को लेकर शंकित था।

लेकिन जैसे ही रथ चुंबकीय जाल पर पहुँचा, अचानक धड़ाम!

रथ ज़मीन में धंस गया, उसके पहिए वहीं फँस गए और लोहे की मशीनें भीतर की ओर मुड़ गईं। चिंगारियां निकलीं, आग लगी और पूरा रथ जलकर राख हो गया।

सब दंग रह गए

कृपाणपुर की सेना रथ के भरोसे आई थी। जैसे ही उनका अद्भुत रथ जल गया, सैनिक डर कर भाग गए। युद्ध बिना लड़े जीत लिया गया।

राजा खुशी से उछल पड़ा —

“शिवा! तुमने तो पूरे राज्य को बचा लिया!”

राजा ने शिवा को राज्य का शाही अभियंता बना दिया, और उसके गांव में “शिवा टेक्नोलॉजी भवन” की नींव रखवाई

सीख:

“शक्ति से बड़ी होती है बुद्धि।”

अगर शत्रु बलवान हो, तो दिमाग से उसे धूल चटाई जा सकती है। शिवा जैसे लोग सच्चे योद्धा होते हैं — जो हथियारों से नहीं, अक्ल से इतिहास बदलते हैं।

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"मैं एक दसवीं कक्षा का छात्र हूँ, जो हिंदी साहित्य और कहानियों का शौक रखता हूँ। मेरी वेबसाइट पर आप विभिन्न प्रकार की हिंदी कहानियों का आनंद ले सकते हैं, चाहे वो प्राचीन लोक कथाएँ हों, प्रेरणादायक कहानियाँ, या मनोरंजक लघु कहानियाँ। मेरा उद्देश्य हिंदी भाषा और उसकी समृद्ध साहित्यिक धरोहर को युवा पीढ़ी के बीच पहुँचाना है, ताकि उन्हें भी इन कहानियों के माध्यम से कुछ नया सीखने और सोचने का मौका मिले।"

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