भूतिया हवेली का रहस्य
एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी, जिसे कोई नहीं छूता था। लोग कहते थे कि वहाँ एक भूत रहता है, जो रात के अंधेरे में घूमता है। गाँव के बच्चे रात में उस हवेली के पास जाने से डरते थे, जबकि बड़े लोग उस पर कहानियाँ सुनाते थे।
एक दिन, गाँव में एक युवा पत्रकार, रोहन, आया। उसने हवेली के बारे में सुना और तय किया कि उसे इसकी सच्चाई जाननी है। उसने गाँव वालों से सवाल किए, लेकिन सभी ने उसे चेतावनी दी कि वहाँ जाना खतरनाक हो सकता है।
रोहन ने सबकी बातों को नजरअंदाज करते हुए एक रात हवेली जाने का फैसला किया। जब वह हवेली पहुँचा, तो उसकी दिल की धड़कन तेज हो गई। हवेली की दीवारें जीर्ण-शीर्ण थीं और खिड़कियाँ भूतिया अंदाज़ में बंद थीं। उसने अपनी टॉर्च ऑन की और अंदर चला गया।
जैसे ही वह अंधेरे में कदम रखता गया, उसे अचानक एक ठंडी हवा का झोंका महसूस हुआ। उसकी टॉर्च की रोशनी ने दीवार पर एक पुरानी तस्वीर को रोशन किया—एक खूबसूरत महिला, जिसकी आँखों में एक अजीब सा दर्द था।
रोहन ने आगे बढ़ने का फैसला किया। अचानक, उसने एक हल्की आवाज सुनी, “मदद करो…” वह ठिठका। “क्या यह सच है?” उसने खुद से कहा। वह आवाज फिर से आई, “यहाँ आओ…”
वह आवाज उसे एक दरवाजे की ओर खींचने लगी। दरवाजे को खोलते ही उसे एक पुराना कमरा मिला, जहाँ दीवारों पर धूल भरी थी। कमरे के बीचों-बीच एक पुराना बक्सा पड़ा था। उसने बक्सा खोला, और अंदर उसे कुछ पुरानी चिट्ठियाँ मिलीं।

जैसे ही उसने चिट्ठियाँ पढ़ना शुरू किया, उसे पता चला कि वह महिला—जिसे उसने तस्वीर में देखा था—उसका नाम सुमित्रा था। सुमित्रा ने अपने प्रेमी के बारे में लिखा था, जो उसे छोड़कर चला गया था। उसकी चिट्ठियाँ उसके दुःख और निराशा को बयां कर रही थीं।
रोहन ने महसूस किया कि सुमित्रा का भूत अभी भी अपने प्रेमी का इंतज़ार कर रहा है। तभी अचानक, कमरा ठंडा हो गया और एक साया उसके सामने प्रकट हुआ। वह वही खूबसूरत महिला थी!
“कृपया मेरी मदद करो,” उसने कहा, “मेरा प्रेमी लौट नहीं आया। मैं यहाँ फँसी हूँ।”
रोहन ने उसे आश्वस्त किया, “मैं तुम्हारे प्रेमी को खोजने की कोशिश करूंगा।” सुमित्रा ने उसकी आँखों में आशा देखी।
वह तुरंत गाँव वापस लौटा और उसने उस प्रेमी के बारे में जानकारी इकट्ठा करना शुरू किया। धीरे-धीरे, उसने सीखा कि उसका नाम राज था और वह एक दुर्घटना में मारा गया था।

रोहन ने गाँव वालों से मदद मांगी और राज की कब्र को खोज निकाला। एक रात, वह फिर से हवेली आया, सुमित्रा की तस्वीर और एक फूल लेकर। उसने राज की कब्र पर फूल रखा और कहा, “सुमित्रा तुम्हारा इंतज़ार कर रही है।”
तभी आसमान में बादल छा गए और एक हल्की बारिश शुरू हुई। अचानक, हवेली की ओर से एक रोशनी निकली, और सुमित्रा का भूत वहाँ प्रकट हुआ। उसने राज की कब्र की ओर देखा और एक हल्की मुस्कान दी।
“धन्यवाद,” उसने कहा, “अब मैं उसे खोज सकती हूँ।”
उस रात, रोहन ने देखा कि सुमित्रा और राज का भूत एक-दूसरे के पास जाते हैं और फिर धीरे-धीरे गायभूतिया हवेली का रहस्यब हो जाते हैं। हवेली की हवा अब शांत हो गई थी, और उस रात के बाद से कोई भी भूतिया कहानियाँ सुनाई नहीं दीं।
रोहन ने जान लिया कि प्यार की शक्ति कभी खत्म नहीं होती, और कुछ आत्माएँ हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ रहती हैं। हवेली का रहस्य अब खत्म हो चुका था, लेकिन उसके भीतर की कहानियाँ हमेशा जिंदा रहेंगी।
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