बहुत समय पहले की बात है, एक फारस देश के किसी शहर में अलीबाबा नाम का एक गरीब लकड़हारा रहता था। उसका जीवन काफी संघर्षपूर्ण था, और वह हर रोज़ जंगल में जाकर लकड़ियाँ काटता और उन्हें शहर के बाजार में बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता। अलीबाबा के पास बहुत कम संपत्ति थी, लेकिन वह मेहनती और ईमानदार व्यक्ति था।
एक दिन, अलीबाबा जंगल में लकड़ियाँ काट रहा था कि तभी उसने दूर से घोड़ों की टापों की आवाज सुनी। उसने देखा कि 40 घुड़सवार उसकी ओर आ रहे हैं। वह जल्दी से डर के मारे पास के एक बड़े पेड़ पर चढ़ गया और खुद को छिपा लिया। घुड़सवार एक गुफा के पास रुके। अलीबाबा ने देखा कि वे चोर थे, और उनका सरदार गुफा के पास जाकर ज़ोर से बोला, “खुल जा सिम-सिम!”।
यह सुनकर गुफा का बड़ा पत्थर खुद-ब-खुद हटा, और सभी चोर अंदर चले गए। अलीबाबा पेड़ पर छिपा हुआ यह सब देखता रहा। थोड़ी देर बाद, चोर गुफा से बाहर निकले, और फिर सरदार ने कहा, “बंद हो जा सिम-सिम!”। गुफा का पत्थर फिर से अपनी जगह पर आ गया, और चोर वहां से चले गए।
अलीबाबा यह सब देखकर दंग रह गया। जब चोर चले गए, तो वह पेड़ से उतरा और गुफा के पास गया। उसने सोचा कि अगर वह भी वही शब्द कहेगा, तो शायद गुफा का दरवाजा खुल जाएगा। उसने हिम्मत जुटाई और कहा, “खुल जा सिम-सिम!”। जैसे ही उसने यह कहा, गुफा का पत्थर हट गया और अलीबाबा अंदर चला गया।
अंदर का दृश्य देखकर अलीबाबा की आंखें फटी की फटी रह गईं। गुफा में चारों तरफ सोने, चांदी, हीरे, जवाहरात, और कीमती वस्तुएं बिखरी पड़ी थीं। यह सब चोरों ने अपने कई सालों की लूटपाट से जमा किया था। अलीबाबा को समझ आ गया कि यह चोरों की लूट की गुफा है। लेकिन वह लालची नहीं था। उसने सिर्फ उतना ही सोना लिया जितना वह अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त समझता था।
अलीबाबा ने अपनी गठरी में थोड़ा सोना भरा और गुफा से बाहर आकर कहा, “बंद हो जा सिम-सिम!”। गुफा का दरवाजा फिर से बंद हो गया। अलीबाबा खुशी-खुशी अपने घर की ओर चल पड़ा। उसने घर पहुँचकर अपनी पत्नी को सब कुछ बताया। उसकी पत्नी बहुत खुश हुई, लेकिन उसने सोना तौलने के लिए पड़ोसी से तराजू मांगने का सोचा।
अलीबाबा के बड़े भाई कासिम का घर पास ही था, और वह काफी अमीर था। अलीबाबा की पत्नी ने कासिम की पत्नी से तराजू माँगी, लेकिन कासिम की पत्नी को शक हुआ कि गरीब अलीबाबा को सोना तौलने की क्या जरूरत पड़ गई। उसने तराजू के नीचे थोड़ा तेल चिपका दिया ताकि पता चल सके कि अलीबाबा ने क्या तौला।
जब अलीबाबा की पत्नी ने सोना तौलकर तराजू वापस किया, तो कासिम की पत्नी ने तराजू के नीचे सोने का एक टुकड़ा चिपका हुआ पाया। उसने तुरंत कासिम को यह बात बताई। कासिम को यकीन नहीं हुआ कि उसका गरीब भाई अचानक इतना अमीर कैसे हो गया। उसने अलीबाबा से सच उगलवाने का फैसला किया।
अगले दिन, कासिम ने अलीबाबा से सख्ती से पूछा कि उसे सोना कहाँ से मिला। अलीबाबा ने अपनी ईमानदारी से सारा सच बता दिया कि कैसे उसने चोरों की गुफा को खोजा। यह सुनकर कासिम लालच में भर गया। वह खुद भी गुफा से सारा सोना लूटने का मन बना चुका था।
कासिम अगली सुबह जल्दी उठकर गुफा पहुँचा। उसने “खुल जा सिम-सिम!” कहा और गुफा में दाखिल हो गया। वहाँ उसने ढेर सारा सोना और कीमती सामान देखा और अपने साथ ले जाने के लिए बड़ी-बड़ी गठरियाँ भर लीं। लेकिन जब वह गुफा से बाहर निकलने की बारी आई, तो वह दरवाजा खोलने वाला मंत्र भूल गया। वह गुफा में फंस गया।
उसी समय, चोर वापस गुफा में आ गए और कासिम को वहां देखकर चौंक गए। उन्होंने बिना देर किए उसे मार डाला। चोरों का सरदार समझ गया कि कोई और भी उनके खजाने के रहस्य को जान चुका है।
जब कासिम घर नहीं लौटा, तो अलीबाबा को चिंता हुई। वह उसकी खोज में निकला और गुफा के पास पहुँचा, जहाँ उसे कासिम का शव मिला। उसने दुखी मन से कासिम का शव निकाला और उसे घर ले आया।
अब चोरों को पता था कि कोई उनके खजाने के बारे में जानता है, इसलिए वे उस व्यक्ति को ढूंढने में लग गए। वे शहर आए और अलीबाबा के बारे में जानकारी जुटाने लगे।
चोरों का सरदार एक चालाक योजना बनाता है। वह तेल के बड़े-बड़े घड़े लेकर अलीबाबा के घर आता है और खुद को एक व्यापारी बताता है। घड़ों के अंदर उसके साथी चोर छिपे होते हैं, जो रात में अलीबाबा पर हमला करने वाले होते हैं।
लेकिन अलीबाबा की नौकरानी मरजिना बहुत बुद्धिमान थी। उसने उन घड़ों में हलचल महसूस की और तुरंत समझ गई कि कुछ गड़बड़ है। उसने चालाकी से उन चोरों को उबलते हुए तेल से मार डाला। जब सरदार को यह बात पता चली, तो वह भागने की कोशिश करता है, लेकिन मरजिना उसे भी मार डालती है।
अलीबाबा को जब इस बात का पता चला, तो उसने मरजिना का धन्यवाद किया और उसे अपने परिवार का हिस्सा बना लिया।
अलीबाबा ने गुफा का रहस्य हमेशा के लिए अपने पास रखा और उस खजाने का इस्तेमाल गरीबों की मदद करने और खुद का जीवन सुधारने में किया।
सीख:
यह कहानी हमें सिखाती है कि लालच और बुराई का अंत हमेशा बुरा होता है, जबकि ईमानदारी, मेहनत और बुद्धिमानी से ही जीवन में सच्ची सफलता प्राप्त होती है।
